वैचारिक बदलाव जरुरी
अपने किसान भाइयों में यदि दोगलापन रहेगा तो नहीं होगा आंदोलन जिंदाबाद!
जैसे, कुरीतियों और अविश्वास में रमे समाज में योग्य शिक्षक नहीं मिल सकते। कई किसान दोनों हाथों में लड्डू लिए हुए हैं।
अपने किसान भाइयों में यदि दोगलापन रहेगा तो नहीं होगा आंदोलन जिंदाबाद!
जैसे, कुरीतियों और अविश्वास में रमे समाज में योग्य शिक्षक नहीं मिल सकते। कई किसान दोनों हाथों में लड्डू लिए हुए हैं।
हरित क्रांति के दौर में (1960s , 70s 80s ) सारी सरकारी मदद किसानों को सिर्फ गेहूं और धान उगाने के लिए मिली। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उस नीति का ज़ोर था खाद्य सुरक्षा, जिसको अनाज के रूप में ही समझा गया। और अनाज में गेहूं और धान को सबसे महत्वपूर्ण माना गया।
हजारों किसानों के लिए, गाजीपुर मोर्चा अब घर से दूर एक घर है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब के किसान यहां एक बड़े परिवार की तरह रह रहे हैं। उन्होंने दिल्ली की सीमा पर एक साथ संघर्ष किया है और त्योहारों को भी एक परिवार के रूप में मना रहे हैं।
किसानों द्वारा भाजपा व उसके सहयोगी दलों के नेताओं का शांतिपूर्वक सामाजिक बहिष्कार देश के अलग अलग राज्यों में जारी है। पहली अप्रैल को हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला का हिसार पहुंचने पर किसानों द्वारा जमकर विरोध किया गया। किसानों ने किसान विरोधी दुष्यंत चौटाला का हवाई जहाज हिसार में उतरने नहीं दिया।
मुल्क के किसान पिछले चार महीने से जनविरोधी तीन खेती कानूनों को रद्द करवाने के लिए बड़े ही व्यवस्थित व अनुशासनिक तरीके से दिल्ली की सरहदों पर बैठे है। लेकिन इसके विपरीत भारत की फासीवादी सत्ता किसानों को सुनने की बजाए पहले दिन से किसानों के खिलाफ झुठा प्रचार कर रही है।

हमने उन्हें सुनानी हैं जो
इंक़लाब की वाणी हैं
पिंड से निकली लहरों को
दिल्ली तक पहुँचानी हैं

जय किसान आंदोलन के संस्थापक योगेंद्र यादव के द्वारा चलाए जा रहे अभियान #MSPLootCalculator तहत 20 मार्च को जारी बयान में बाजरा की फसल पर एमएसपी (MSP) के सरकारी दावों की पोल खोलते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री मोदी या भाजपा के प्रवक्ता ताल ठोक कर कहते हुए मिलें कि ‘एमएसपी थी,

गुरमुख सिंह, उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के खैरीगढ़ गांव से हैं और किसानी परिवार से हैं। किसानों के साथ ही वे पहली बार ग़ाज़ीपुर मोर्चे पर आए। 26 नवम्बर को उत्तराखंड के रुद्रपुर से वे 400 किसानों के साथ निकले लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस ने उन्हें आगे नहीं जाने दिया। उन्होंने दो रातों तक नानकपुरी तांडा के गुरुद्वारे के लंगर में सेवा दी।

नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के हौसले ना सिर्फ बुलंद हैं, बल्कि वे दोगुने उत्साह के साथ केंद्र सरकार से मोर्चा लेने के लिए तैयारियां कर रहे हैं। शाहजहांपुर खेड़ा बॉर्डर पर किसानों के आंदोलन को सौ दिन पूरे हो गए हैं, लेकिन उनकी हिम्मत और हौंसले कमजोर नहीं हुये है।

किसानों से डरी सत्ता
बॉर्डर पर खाइयां कीले, कटीले तार दीवार
बहुपरत की सीमेंटेड बेरिकेडिंग
सर्मथक, आवश्यक सुविधाओं की पहुंच
बाधित

शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के शहादत दिवस 23 मार्च, के दिन भाकपा (माले) लिबरेशन और इसके सभी सम्बद्ध संगठनों ने आंध्रप्रदेश के विशाखापट्टनम में तीन खेती कानूनों और वाईज़ैग स्टील प्लांट के निजीकरण के विरोध में एक जन संसद का आयोजन किया।

जलवायु बदलाव का संकट तेजी से विश्व के सबसे बड़े पर्यावरणीय संकट के रूप में उभरा है। जीवन के विभिन्न महत्वपूर्ण पक्षों के संदर्भ में इस संकट को समझना जरूरी हो गया है। भारत में आजीविका का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत कृषि व इससे जुड़े विभिन्न कार्य हैं।
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