Day: ਅਪ੍ਰੈਲ 1, 2021

सम्पादकीय

तो क्या अब किसान आंदोलन कमजोर पड़ रहा है?, क्या किसान घरों को वापिस लौट रहे हैं?, आपको क्या लगता है कि आप कब तक मोर्चों पर बैठे रहेंगे?, क्या आपको लगता है कि किसानों की जीत होगी? ये सवाल आज कल आप में से कईयों ने सुने होंगे।

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भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव की शहादत और किसान आंदोलन

23 मार्च, एक ऐतिहासिक दिन जब ब्रिटिश कंपनी राज के खिलाफ चल रहे आज़ादी आंदोलन को क्रांतिकारी दिशा देने वाले भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव तीन ऊर्जावान क्रांतिकारी आवाज़ों को फांसी के द्वारा खामोश करने की कोशिश हुई थी। लेकिन उस दौर में भी भगत सिंह ने जो क्रांतिकारी दिशा पूरे आजादी आंदोलन को दी उसको ब्रिटिश राज खामोश करने में असफल हुआ और भारत से उसे जाना पड़ा था।

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किसान आंदोलनों का प्रकाश पुंज है मुजारा आंदोलन

पंजाब के मुजारा आंदोलन के बारे में बाक़ी देश या तो जानता ही नहीं है या बहुत ही कम जानता है। मैं इस लोकसभा चुनाव में कामरेड रुल्दूसिंह के साथ किसानों के बीच चुनाव प्रचार के लिए मानसा जिले के किशनगढ़ गांव भी गया था।

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साहिर लुधियानवी : हर वक़्त का शायर

क शायर एक गीतकार जिसने अपने वक़्त के साथ साथ आने वाले सौ सालों के लिए गीतों, नज़्मों और ग़ज़लों का ज़खीरा पेश किया। साहिर के शब्द दुनयावी हक़ीक़त और उसमें मौजूद दिक्कतों को खुलेआम गीतों, ग़ज़लों और नज़्मों के ज़रिये कह रहें थें और सवाल कर रहें थें। फिल्म प्यासा के लिए लिखा गीत इसके उदाहरण हैं,

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बिहार में किसान आंदोलन

दिल्ली सीमा से लगभग 1000 किलोमीटर दूर बिहार के सीतामढ़ी जिले के डायन छपरा में रहने वाले किसान ओमप्रकाश कुशवाहा ने अब तक किसानों के प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया है, लेकिन वे किसानों के आंदोलन के समर्थन में हैं।

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स्पेन के किसानों के लिए आया बदलाव

किसानों के कई महीनों के विरोध-प्रदर्शनों के बाद स्पेन में एक ऐसा क़ानून आया है जिस के तहत उत्पादन पर आने वाली लागत से कम दाम पर भोजन की बिक्री की मनाही होगी। शॉन डाइवर आयरलैण्ड में भेड़ों का एक फ़ार्म सम्भालते हैं।

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कहीं भी अन्याय, हर जगह न्याय के लिए ख़तरा है

अमेरिकी सरकार द्वारा वित्त पोषित फ्रीडम हाउस ने हाल ही में स्वतंत्रता सूचकांकों में भारत के स्वतंत्रता स्तर में महत्वपूर्ण गिरावट की घोषणा करते हुए भारत को ‘मुक्त’ नहीं बल्कि केवल ‘आंशिक रूप से मुक्त’ स्थान दिया है।

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आदरणीय मोदी जी

यह चिट्ठी आपके ताजे असत्य कथन कि ; “केरल में एपीएमसी की मंडियां नहीं हैं, वहां  प्रोटेस्ट क्यों नहीं होता” पर है। इधर बहुत सारे लोग आपकी डिग्रियों, एंटायर पॉलिटिक्स साइंस के विषय वगैरा को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।

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