19वीं सदी में मेक्सिकन किसानों के संघर्ष का संक्षिप्त इतिहास

मेक्सिको में, किसानों के संघर्ष का एक लम्बा इतिहास रहा है और अनेक बार उन्होंने सत्ता के ख़िलाफ़ स्मरणीय विद्रोहों का नेतृत्व किया है। क्रांतिकारी परिवर्तनों से भरे 19वीं शताब्दी का शुरुआती दशक, मेक्सिको के इतिहास में अहम रहा है। यह वही दौर था, जब हर तरफ़ व्याप्त असमानता ने किसानों का जीवन दूभर कर रखा था। इस समय किसानों के हित सीधे तौर पर औपनिवेशिक शासन से टकराते थे और उनके ख़िलाफ़ लड़ाई किसानों के संघर्ष का मुख्य केंद्र था।

1810 से 1930 तक के दशक संघर्षों और हिंसा से भरे हुए प्रतीत होते हैं, खासकर जब इनकी तुलना औपनिवेशिक युग से की जाए। इस दौरान ज़मीन पर क़ब्ज़ा रखने वाले स्पेनिश अभिजात वर्ग ने मैक्सिकन किसानों पर विभिन्न तरीकों से और विभिन्न स्तरों पर शासन/शोषण किया। यहाँ हमें उन कारणों पर गौर करने की ज़रूरत है जिनकी वजह से उन्नीसवीं सदी के दौरान मैक्सिकन अभिजात वर्ग और किसानों के बीच हिंसा के स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। मेक्सिको के अभिजात वर्ग आसीएंदा में उपजे मक्के और अन्य वस्तुओं को मेक्सिको सिटी के बाज़ार में उपलब्ध कराया करते थे। आसीएंदा स्पेनिश-अमेरिकी अभिजात वर्ग द्वारा संचालित एक व्यवस्था थी, जहां कृषि, निर्माण, खनन या पशुओं को पालना जैसे कार्य होते थे । अभिजात लोगों के रहने के लिए यहाँ आलीशान घर होता था और ग़ुलामों और चरवाहों के लिए कच्ची झोपड़ियाँ भी होती थीं। आसीएंदा के मालिक और किसान एक-दूसरे पर निर्भर थे, पर अक्सर ज़मीन और अन्य संसाधनों को लेकर इनके बीच विवाद भी  हुआ करता था।

1821 में मेक्सिको, औपनिवेशिक ताक़तों से तो आज़ाद हो गया था, पर अब उस पर पूरे तौर से स्पैनिश-अमेरिकन अभिजात वर्ग का क़ब्ज़ा था और इसलिए आज़ादी के बाद भी उसके सामाजिक संरचना में कोई मूलभूत परिवर्तन नहीं आ पाया। मौजूदा सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों को ध्वस्त किए बिना राजनीतिक स्वायत्तता प्राप्त करना, स्पष्ट रूप से मैक्सिकन अभिजात वर्ग के लिए विरोधाभासी साबित हुआ। आज़ादी के ठीक बाद मेक्सिको गहराते आर्थिक संकट के चंगुल में फँसता चला गया। स्वतंत्रता संग्रामों के लम्बे दौर ने पहले ही एक दशक तक वाणिज्य और खनन को बुरी तरह बाधित किया था। चांदी का उत्पादन, जिसने अठारहवीं शताब्दी के दौरान फलती-फूलती मैक्सिकन अर्थव्यवस्था का नेतृत्व किया था, कमजोर होने लगी थी। कई सम्पदाएँ गृहयुद्ध के विनाश से पीड़ित थीं, जबकि बाकी क्षेत्र उत्पादन और विनिमय के व्यवधानों से बिगड़ गए। 1821 के बाद अभिजात वर्ग को अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण के लिए अधिक पूंजी की आवश्यकता थी, लेकिन पूंजी दुर्लभ होती जा रही थी।

स्वतंत्रता ने किसान समुदायों की संरचना में भी बदलाव लाए, जो औपनिवेशिक कृषि सत्ता संरचना में  प्रमुख जगह रखते  थे, पर इसके बावजूद, स्वतंत्रता के तुरंत बाद किसान समुदाय निर्णायक रूप से कमजोर नहीं हुए थे। 1860  के दशक के दौरान, चाल्को और अन्य जगहों के लोगों ने बार-बार स्थानीय नेताओं के साथ मिलकर निर्मम संघर्ष  किया, ताकि जमींदारों और राज्य के अधिकारियों के कार्यों को चुनौती दी जा सके। किसान समुदाय, जमींदार, अभिजात वर्ग और राज्य की तुलना में, स्वतंत्रता के बाद उत्पन्न कठिनाइयों से बेहतर तरीके से बचे रहे। राज्य विभाजित और कमजोर होने के साथ वित्तीय कठिनाइयों का सामना कर रहा था, जबकि किसान समुदाय अपेक्षाकृत मजबूत बने रहे। यह भी एक वजह रही जिसने अभिजात वर्ग और किसानों के बीच संघर्ष को विकसित किया। स्वतंत्रता के बाद निरंतर वित्तीय समस्याओं का सामना करते हुए 1840 के दशक के अंत तक चाल्को के जमींदार अभिजात वर्ग ने मुनाफे की तलाश में कुछ नया करने की कोशिश की, लेकिन उनके इस कदम ने केवल श्रम मांगों में वृद्धि की और इस प्रकार उनकी समस्याओं में और इज़ाफ़ा ही हुआ। पानी की बढ़ती मांग ने निर्माण परियोजनाओं को जन्म दिया जिसने किसान समुदायों के साथ नए संघर्ष पैदा किए। चाल्को किसान समुदायों ने स्थानीय भूमि और जल संसाधनों पर राज्य के बढ़ते नियंत्रण को निष्क्रिय रूप से स्वीकार नहीं किया। स्थानीय किसान नेताओं ने अदालतों में इन किसान विरोधी कार्रवाइयों को चुनौती दी, और जब अदालत के फैसले अनुकूल नहीं निकले, तो उन्होंने अपना संघर्ष तेज किया।

1849 से ही चाल्को राज्य और किसान समुदायों के बीच गहरे संघर्ष का केंद्र रहा था। हालांकि, उन संघर्षों को हमें उन बिखरे किसान विरोधों के विस्तृत श्रृंखला के संदर्भ में रखना ज़रूरी है, जो कि मध्य और दक्षिणी मैक्सिको के अधिकांश हिस्सों में एक साथ विकसित हुए थे। 1840 के दशक के उत्तरार्ध में किसानों के बढ़ते संघर्षों को देखते हुए , अभिजात वर्ग ने राज्य की मजबूती को एकमात्र समाधान के रूप में देखा। कई मैक्सिकन राज्यों के शासकों ने ग्रामीण पुलिस बल बनाने की ओर रुख किया। मेक्सिको राज्य ने 1849 के अक्टूबर में ग्रामीण पुलिस के निर्माण का कानून बनाया। लेकिन मैक्सिकन अभिजात वर्ग के लिबरल तबक़े के पास अधिक व्यापक और चालबाज़ योजनाएँ थीं, जो एक साथ किसान समुदायों की आर्थिक और राजनीतिक अतिक्रमण का विरोध करने की क्षमता को कमजोर कर सकती थी। उदारवादियों ने सामुदायिक संपत्ति अधिकारों के उन्मूलन का प्रस्ताव रखा। इससे किसान भूमि से वंचित तो नहीं हुए, पर सामुदायिक ज़मीन पर नियंत्रण ख़त्म होने से, जो एकजुटता की नींव उनके बीच थी, वो ज़रूर कमज़ोर हो गयी। अब छोटे भूखंड वाले किसानों को अकेले ही सरकारी अधिकारियों का सामना करने के लिए विवश होना पड़ा। पहले वे संयुक्त संपत्ति अधिकारों वाले सामुदायिक समूहों के रूप में सरकार की नीतियों के ख़िलाफ़ ज़्यादा मुस्तैदी से लड़ते थे। हालाँकि 1910 में शुरू हुए संघर्षों की तुलना में उन्नीसवीं सदी के मध्य के संघर्ष संक्षिप्त और क्षेत्रीय रूप से अलग-थलग रहे। 1910 तक, मैक्सिकन किसान भूमि सुधार के अपने लक्ष्यों को संघर्ष द्वारा प्राप्त करने को तैयार थे। कुलीन वर्ग भी आपस में बटा हुआ था और अपने राजनीतिक लाभ के लिए किसानों का समर्थन पाने के लिए तैयार था। इसके परिणामस्वरूप मेक्सिको क्रांति  की शुरुआत से ही हिंसक क्रांतिकारी संघर्ष की एक विस्तारित अवधि देखने को मिलती है। हालाँकि किसानों ने कभी भी राज्य के नियंत्रण का दावा नहीं किया, लेकिन उन्होंने राजनीतिक नेताओं को किसान हितों के साथ समझौता करने के लिए मजबूर ज़रूर कर दिया। बीसवीं शताब्दी की शुरुआत के संघर्षों में किसानों की भागीदारी के कारण जमींदार अभिजात वर्ग को गंभीर हार का सामना करना पड़ा। शायद मजबूत राज्य और अर्थव्यवस्था के व्यावसायीकरण के दौर में ही किसानों के लिए यह अधिकतम जीत संभव था।