Author: Amrit Raj

19वीं सदी में मेक्सिकन किसानों के संघर्ष का संक्षिप्त इतिहास

मेक्सिको में, किसानों के संघर्ष का एक लम्बा इतिहास रहा है और अनेक बार उन्होंने सत्ता के ख़िलाफ़ स्मरणीय विद्रोहों का नेतृत्व किया है। क्रांतिकारी परिवर्तनों से भरे 19वीं शताब्दी का शुरुआती दशक, मेक्सिको के इतिहास में अहम रहा है। यह वही दौर था, जब हर तरफ़ व्याप्त असमानता ने किसानों का जीवन दूभर कर रखा था

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आख़िर अपनी जमीन छोड़, विस्थापित होने के लिए क्यों मजबूर हो रहे हैं चीली (Chile) के किसान?

धरती के पश्चिमी गोलार्ध में स्थित, एक छोटा-सा देश चीली, आज उन देशों की गिनती में आता है, जो सूखे की समस्या से बुरी तरह से ग्रसित है। 2010 से चीली में बारिश की कमी से उत्पन्न सूखे ने, वहाँ के किसानों की मुश्किलें बहुत बढ़ा दी हैं।

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नए कृषि क़ानून: किसका फ़ायदा, किसका नुक़सान

न्यूज़ की सुर्ख़ियों और मध्यमवर्गीय जनता की नज़र में, किसान तब तक नहीं आते, जब तक आत्महत्या के आँकड़ों पर बहस ना छिड़ी हो। “जय जवान जय किसान” वाले देश में, जवानों पर तो खूब चर्चा होती रही है, पर ऐसे बहुत कम उदाहरण रहें हैं, जब किसानों और उनकी माँगों को, टीवी डिबेट में उचित जगह मिली हो।

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पेरू में भूमि सुधारों का दौर और किसान आंदोलन

पेरू के किसानों के जीवन में 1969 के भूमि सुधार के  बाद आए परिवर्तनों को समझने के लिए पेरू के पारम्परिक ग्रामीण संरचना को समझना अनिवार्य है। ग्रामीण पेरू में खेती; तटीय और पहाड़ी भागों में विभाजित है। अगर हम उत्पादन संबंध की बात करें तो, 1969 के पूर्व इन इलाकों में भूस्वामियों का वर्चस्व था।

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मैक्सिको के आंदोलनरत किसान

इतिहास के कई पेचीदे पड़ावों से गुजरते हुए मेक्सिको के किसानों ने औपनिवेशिक ताक़तों से ले कर साम्राज्यवादी मगरमच्छों तक का डट कर सामना किया है।  इस लम्बे और संघर्षशील इतिहास की एक झलक हमें तब देखने मिलती जब 1990 के बाद हुए  कृषि सुधारों का जिक्र आता है, जिसका खामियाजा मेक्सिको के किसान अभी तक भुगत रहे हैं।

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कृषि के निजीकरण के ख़िलाफ़ दक्षिणी अमेरिकी किसान आंदोलनों की एक झलक

एक जमाने में दक्षिणी अमेरिकी महाद्वीप प्राकृतिक संपदाओं का भंडार हुआ करता था। वहाँ के मेहनतकश किसान अपने ज्ञान और मेहनत से  ज़मीन की उर्वरता का बड़ा ही कुशल प्रबंधन करते थे। पहले उपनिवेशवाद ने और अब नव-उदारवादी नीतियों ने दक्षिणी अमेरिकी किसानों

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