गुरु की गोलक, गरीब का मुँह…

गुरु की गोलक, गरीब का मुँह…

गाजीपुर में अगर किसी ने भी गुड़ वाली चाय पीनी हो तो तरनतारन वालों के पंडाल का ही ध्यान आता है। बाबा सतनाम सिंह जी गुरुद्वारा खड़े दा खालसा (गाँव – नुशैरा पन्नु, ज़िला तरनतारन साहिब, पंजाब) के जत्थेदार हैं। बाबा जी हर साल गुरुद्वारे की गोलक ग़रीबों में उनकी सहायता करने हेतु बाँटते हैं जिसमें किसी गरीब की बेटी की शादी करवाते या अपने निजी राजगीरों द्वारा गरीबों के घर बनवाना शामिल है। यह लेख लिखे जाने तक भी ऐसे 3 घर बन रहे हैं। यही नहीं बेसहारा बुजुर्गों को रहने की व्यवस्था और जरूरत पड़ने पर आर्थिक मदद भी करते हैं । पूछने पर वह बताते हैं कि भगवान की कृपा से जो भी लोग गुरुद्वारे में दान करते हैं वह सारा सेवा में लगा दिया जाता है क्योंकि हमारे गुरु साहिब ने फ़रमान किया था ‘गुरु की गोलक गरीब का मुँह’, जिसका हम निशंक पालन कर रहे हैं।

अपनी सेवा भावना को जारी रखते हुए उन्होंने बाबा दिलबाग सिंह जी के नेतृत्व में 40 सिंह 20 दिसंबर 2020 को किसान मोर्चे में भेजे। पहले तह जत्था सिंघु मोर्चे में गया और फिर आवश्यक सामग्री लेकर ग़ाज़ीपुर मोर्चे में आया। तब यहाँ अभी पंडाल लग रहे थे तो जथे ने यहीं रहकर संगत की सेवा करने का मन बनाया। आते ही उन्होंने लंगर की सेवा शुरू की जिसमें सबसे पहले गुरुद्वारे के बने हुए गुड़ की चाय बनाई। कड़ाके की सर्दी में गरम गरम गुड़ की चाय सभी किसान भाइयों ने बहुत पसंद की और ये पंडाल गुड़ वाली चाय के नाम से मशहूर हो गया। यहाँ पर लंगर में सरसों का साग, मक्के की रोटी, बाजरे की रोटी, आलू टिक्की, चटनी इत्यादि भोजन बनाए जाते हैं। चौ: राकेश टिकैत ने जब 28 जनवरी को किसानों के साथ मिलकर ग़ाज़ीपुर मोर्चे में नयी जान डाली तो बाबा जी ने इन्हें सोने के हार से सम्मानित  किया।

अब इस जत्थे के सेवादार 15 दिन बाद राशन लेने जाते हैं और दूसरे सेवादार आ जाते हैं। जनवरी महीने से लगातार यही सिलसिला चल रहा है। कुछ सेवादार यहाँ पर लंबे समय तक रुकते हैं ताकि नए आए हुए सेवादारों का नेतृत्व कर सकें। सेवादारों ने बताया कि आंदोलन का हिस्सा बनकर वह अपने आपको गौरवान्वित महसूस करते हैं। मोर्चे पर रहते किसानों ने इस जत्थे की बहुत प्रशंसा की और बताया कि आधी रात को भी अगर कोई किसान या मोर्चे पर आने वाला व्यक्ति लंगर शकना चाहे तो मोर्चे के किसी भी पंडाल में सेवादारों से माँग सकता है। इस पंडाल में देर रात तक चाय की सेवा चलती है। हम खुश हैं कि ग़ाज़ीपुर मोर्चे में पंजाब से आए हुए भाई हमारी इतनी सेवा व सहायता कर रहे हैं।

गाज़ीपुर के किसानों का कहना है कि सरकार यदि किसानों का भला चाहती है तो अपने काले क़ानून वापिस ले ले क्योंकि जब तक क़ानून वापिसी नहीं तब तक घर वापिसी नहीं।

 

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