Author: Harsharanjit Kaur

गुरु की गोलक, गरीब का मुँह…

गाजीपुर में अगर किसी ने भी गुड़ वाली चाय पीनी हो तो तरनतारन वालों के पंडाल का ही ध्यान आता है। बाबा सतनाम सिंह जी गुरुद्वारा खड़े दा खालसा (गाँव – नुशैरा पन्नु, ज़िला तरनतारन साहिब, पंजाब) के जत्थेदार हैं। बाबा जी हर साल गुरुद्वारे की गोलक ग़रीबों में उनकी सहायता करने हेतु बाँटते हैं

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पढ़ा लिखा किसान देश की शान

मालूक सिंह खिंडा, 59, पुत्र स्वर्गीय मुख्तियार सिंह, ननकमत्ता, उत्तराखंड के एक किसान परिवार से हैं और न्यू लाइट स्कूल के मालिक हैं। ग़ाज़ीपुर मोर्चे के किसान आंदोलन में शामिल होकर अपना पूर्ण समर्थन दे रहे हैं। बल्कि मोर्चे में डटे रहते हुए अपने घर में साँढु के बेटे की शादी में भी शामिल नहीं हो पाए।

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वैसाखी और जलियाँवाला बाग

13 अप्रैल को ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर वैसाखी पर्व मनाया गया और जलियाँवाला बाग के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गयी । 

 वैसाखी पर्व सिखों में बहुत महत्व रखता है क्योंकि इस दिन 1699 को सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ सजाया था। पाँच सिखों को अमृत छका कर खालसा फ़ौज में शामिल किया।

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ये आंदोलन अन्न-खाता का भी है: दलजीत सिंह

दलजीत सिंह, 54, विर्क फ़ार्म किच्छा, उत्तराखंड के निवासी हैं। वे एक किसान परिवार से है व पेशे से डॉक्टर हैं । दलजीत सिंह का कहना है कि इन तीन काले कानूनो के बारे में उन्हें विभिन्न समाचार पत्रों ऐवं सोशल मीडिया से ज्ञात हुआ और तराई किसान संघठन में शामिल होकर उन्होंने इनका विरोध पहले तहसील स्तर, फिर ज़िला स्तर पर किया ।

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विपुल- एक किशोर प्रदर्शनकारी

किसी भी आकर्षक, सुंदर और मासूम सा दिखने वाला लड़का विपुल, गाजीपुर मोर्चा का एक युवा प्रदर्शनकारी है। उसने अभी तक किशोरावस्था को पार नहीं  किया है। वह सिर्फ 18 साल का है। बीबीए द्वितीय वर्ष का छात्र विपुल, गाजियाबाद जिले के शेरपुर गांव का रहने वाला है।

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होली के रंग, किसानों के संग

हजारों किसानों के लिए, गाजीपुर मोर्चा अब घर से दूर एक घर है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब के किसान यहां एक बड़े परिवार की तरह रह रहे हैं। उन्होंने दिल्ली की सीमा पर एक साथ संघर्ष किया है और त्योहारों को भी एक परिवार के रूप में मना रहे हैं।

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…तब तक हम घर वापिस नहीं जाएँगे

गुरमुख सिंह, उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के खैरीगढ़ गांव से हैं और किसानी परिवार से हैं। किसानों के साथ ही वे पहली बार ग़ाज़ीपुर मोर्चे पर आए। 26 नवम्बर को उत्तराखंड के रुद्रपुर से वे 400 किसानों के साथ निकले लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस ने उन्हें आगे नहीं जाने दिया। उन्होंने दो रातों तक नानकपुरी तांडा के गुरुद्वारे के लंगर में सेवा दी।

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गाजीपुर में गर्मी की तैयारी

100 से अधिक दिन और उनके पीछे 300 मौतें, किसान की धैर्य, दृढ़ संकल्प और संकल्प से अचंभित हैं। फसल कटाई का मौसम चल रहा है और किसान सावधानी के साथ फसल कटाई की योजना बना रहे हैं। गाजीपुर मोर्चा में प्रबंधन समिति ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और अन्य राज्यों के प्रत्येक गाँव की भागीदारी के लिए एक रोस्टर बनाया है।

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हम लड़ेंगे-हम जीतेंगे

रुद्रपुर) उत्तराखंड ने रुद्रपुर जिला के ऊधम सिंघ नगर में पहली मार्च 2021 को किसान महापंचायत का आयोजन किया।  इस स्थल को पहले मोदी मैदान कहा जाता था।सभा में  इस मैदान का नाम बदल कर किसान मैदान  रखा  गया ।

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74 वर्षीय जसवीर कौर

उत्तर प्रदेश के बिलासपुर ज़िले के बिशारतनगर से आने वाली 74 वर्षीय जसवीर कौर को कमेटी के द्वारा 14 जनवरी को वापस भेजा गया और 13 फ़रवरी को जसवीर कौर ग़ाज़ीपुर मोर्चे पर रुकने के लिए वापस आ गई। ‘मैं किसानी परिवार से हूँ

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