वैचारिक बदलाव जरुरी

कॉमरेड कृष्णचंद, जींद, हरियाणा

अपने किसान भाइयों में यदि दोगलापन रहेगा तो नहीं होगा आंदोलन जिंदाबाद! 

जैसे, कुरीतियों और अविश्वास में रमे समाज में योग्य शिक्षक नहीं मिल सकते। कई किसान दोनों हाथों में लड्डू लिए हुए हैं। राजनीतिक महत्वाकांक्षा भी रखते हैं और आंदोलन को अभी सफल करना चाहते हैं। ये असंभव है। हमारे अंदर व्यक्तिगत भावना महत्वशाली है। और सामाजिक भावना गौण है। जब हमारी सोच जात-पात श्रेष्ठ -अश्रेष्ठ, गोत्र-जाति तक सीमित रहेगी तब तक उद्धार होने वाला नही है। न हिन्दू बनो, न मुसलमान बनो, केवल इंसान बनो। फूलो और फलो-जिओ और जीने दो- यह भावना रखो! प्रार्थना स्थान पर कभी ग्रहण नही लगता जब तक सांस है। अर्थात अपने घर मंदिर में या सूर्य नमस्कार करते समय हे सूर्य देवता! आज मैं कुछ बेहतर बनूँ, कल से और अच्छा। 

सोच बदलोगे तो बदलाव आयेगा वर्ना नहीं। तुम सिर्फ करम करने के लिए आये हो – फल तेरे हाथ में नही है। सिर्फ और सिर्फ अपने लिए मत जिओ। समाज के लिए जिओ। जीना यहाँ मरना यहाँ, जायेगा कहाँ? अगर आपकी नियत साफ नहीं तो उद्देश्य साफ कैसे हो सकता है? तुम एक प्रायोजित समाज में जी रहे हो – तुम्हारी एकता खुर्द बुर्द करने के लिए राजनैतिक – प्रशासनिक और छुटभैया नेता प्रयासरत है। जैसे प्रधानमंत्री मोदी कहते है ये तो केवल कुछ जाति का आन्दोलन है। ये तो झूठमुठ का बहकावा है। मेरे विरोधियों की शरारत हैं। देश की तरक्की देख कर जल रहे है। हमारे देश की तरक्की सहन नहीं होती।

अपने देश के नागरिक को आन्दोलन जीवी कहना तानाशाही का सबूत है। यहाँ का नागरिक प्रधानमंत्री बनता है। इस सामाजिक पतन के दौर में विश्वास तो करना पड़ेगा। चाहे सामूहिक फैसले से करों। विश्वास के बिना जीवन ऐसा, जैसा बिना पंखो के पक्षी। विश्वास के बिना गृहस्थ जीवन नहीं चल सकता है, तो बिना इसके समाज तो चल ही नहीं सकता है। या तो अपनों के साथ लग जाओं, या तो उनकों अपने साथ लगाओं। संगठन की मजबूती सफलता के लिए सर्वप्रथम आवश्यक हैं। इतनी पहचान तो हो कि कौन मित्र है या दुश्मन कौन है? दूसरों की ओर ना देखों, स्वयं की ओर देखो। अपनी भागीदारी इस कदर सुनिश्चित करो कि पर्दा गिरने के बाद भी तालियाँ बजती रहे। अपनी ओर देखो, इस दौर में अपनी सोच और व्यवहार को ठीक करो। रेशनल व्यवहार न करोगे, तो मिट जाओगे। आने वाली पीढ़ी और कलंकित करेगा। मनुष्य की बजाय किसी और जानवर का जन्म ले लेते। अन्नदाता तेरी तो कई पीढियां दुसरो के लिए जीती आई है। 

भारत माता की जै! जै जवान, जै किसान!