Author: Khushveer Singh

ਕਿਵੇਂ ਕਾਰਪੋਰੇਟ ਖਾ ਗਏ ਅਮਰੀਕਾ ਦੀ ਛੋਟੀ ਕਿਸਾਨੀ ਨੂੰ

ਲਗਭਗ 40 ਸਾਲ ਪਹਿਲਾਂ ਅਮਰੀਕਾ ਨੇ ਖੇਤੀ ਸੈਕਟਰ ਨੂੰ ਕਾਰਪੋਰੇਟ ਦੇ ਹੱਥਾਂ ਵਿੱਚ ਦਿੱਤਾ ਸੀ ਜੋ ਹੁਣ ਭਾਰਤ ਸਰਕਾਰ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੀ ਹੈ।  ਸ਼੍ਰਿਸਟੀ ਅਗਰਵਾਲ, ਰਾਜਾਸਿਕ ਤਰਫਦਾਰ, ਰੋਮੇਲਾ ਗੰਗੋਪਾਧਇਆਏ ਅਤੇ ਬੇਦਾਬਰਾਤਾ ਪੇਨ ਨੇ ਅਮਰੀਕਾ ਵਿੱਚ 10,000 ਕਿੱਲੋਮੀਟਰ ਲੰਬਾ ਸਫਰ ਕਰਕੇ ਉੱਥੋਂ ਦੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨਾਲ਼ ਜੋ ਇਹਨਾਂ 40 ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ ਹੋਇਆਂ ਉਸਦੀ ਸੱਚਾਈ ਸਾਹਮਣੇ ਲਿਆਂਦੀ ਹੈ।

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ਫੂਡ ਸਪਲਾਈ ਇੰਸਪੈਕਟਰ ਨਾਲ਼ ਮੁਲਾਕਾਤ

ਇੰਸਪੈਕਟਰ ਕਿਵੇਂ ਬਣੇ ?

ਮੈਂ ਬੀ ਟੈੱਕ ਇਲੈਕਟਰੌਨਿਕਸ ਕੀਤੀ ਸੀ। ਪ੍ਰਾਈਵੇਟ ਖੇਤਰ ਵਿਚ ਨੌਕਰੀ ਲੱਭੀ ਪਰ ਉਦੋਂ ਰਿਸੈਸ਼ਨ ਹੋਣ ਕਰਕੇ ਗੱਲ ਨਹੀਂ ਬਣੀ। ਫਿਰ ਸਰਕਾਰੀ ਨੌਕਰੀਆਂ ਦੇ ਪੇਪਰ ਦਿੱਤੇ ਤਾਂ ਇਹ ਮਿਲ ਗਈ।  

ਤੁਹਾਡਾ ਕੰਮ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?

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सम्पादकीय

भारत का वर्तमान किसान आंदोलन अपने कई ऐतिहासिक पड़ावों को पर करता हुआ आगे बढ़ रहा है। यह आंदोलन अब न सिर्फ किसानों का आंदोलन है बल्कि देश के आम मेहनतकशों का आंदोलन भी बनता जा रहा है। 26 मार्च का ऐतिहासिक भारत बंद इसका प्रमाण है।

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वैचारिक बदलाव जरुरी

अपने किसान भाइयों में यदि दोगलापन रहेगा तो नहीं होगा आंदोलन जिंदाबाद! 

जैसे, कुरीतियों और अविश्वास में रमे समाज में योग्य शिक्षक नहीं मिल सकते। कई किसान दोनों हाथों में लड्डू लिए हुए हैं।

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हरित क्रांति ने किस तरह कुपोषण को बढ़ावा दिया?

हरित क्रांति के दौर में (1960s , 70s 80s ) सारी सरकारी मदद किसानों को सिर्फ गेहूं और धान उगाने के लिए मिली। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उस नीति का ज़ोर था खाद्य सुरक्षा, जिसको अनाज के रूप में ही समझा गया। और अनाज में गेहूं और धान को सबसे महत्वपूर्ण माना गया।

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मोर्चों से परे किसान अांदोलन का असर

किसानों द्वारा भाजपा व उसके सहयोगी दलों के नेताओं का शांतिपूर्वक सामाजिक बहिष्कार देश के अलग अलग राज्यों में जारी है। पहली अप्रैल को हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला का हिसार पहुंचने पर किसानों द्वारा जमकर विरोध किया गया। किसानों ने किसान विरोधी दुष्यंत चौटाला का हवाई जहाज हिसार में उतरने नहीं दिया। 

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किसान जन-आन्दोलन में बढ़ता आक्रोश

मुल्क के किसान पिछले चार महीने से जनविरोधी तीन खेती कानूनों को रद्द करवाने के लिए बड़े ही व्यवस्थित व अनुशासनिक तरीके से दिल्ली की सरहदों पर बैठे है। लेकिन इसके विपरीत भारत की फासीवादी सत्ता किसानों को सुनने की बजाए पहले दिन से किसानों के खिलाफ झुठा प्रचार कर रही है।

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