यूके में रहने वाले भारतीय किसान आंदोलन का समर्थन क्यों कर रहे हैं?

मिनरीत कौर

तीन नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे भारतीय किसानों और सरकार द्वारा सबसे बड़े विरोध के दमन का फुटेज दुनिया भर में वायरल हो चुका है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन से सवालों के दौरान भी यह मुद्दा उठाया गया है। यूके सरकार जवाब देने में विफल रही लेकिन ब्रिटेन में अप्रवासी चाहते हैं कि उनकी आवाज सुनी जाए। उन्होंने सड़कों पर उतर कर और इंटरनेट पर अपना समर्थन दर्ज कर भारतीयों का दिल जीत लिया है। विरोध के लिए अंतरराष्ट्रीय आवाजों का समर्थन में जुड़ना पहले से कहीं अधिक जरूरी है। यूके में ब्रिटिश भारतीय, यहाँ हो रही हिंसा की भयानक घटनाओं को, कार्यकर्ताओं के साथ हो रहे यौन उत्पीड़न को, आवाज उठाने पर हो रही गिरफ़्तारी और गायब हो रहे किसानों को देख रहे हैं। कई लोग सोशल मीडिया पर  ‘दुनिया देख रही है’ हैशटैग का उपयोग कर रहे हैं।

हर्टफ़ोर्डशायर में डेटा विश्लेषक सुनीता हयरे भारत से मीलों दूर हैं और इस दूरी ने उनमें किसानों के साथ एकजुटता में आवाज उठाने की इच्छा और बढ़ा दी है। सरकार द्वारा किसानों के खिलाफ किए जा रहे झूठे प्रचार से भी वे चिंतित हैं। ट्रॉली टाइम्स को उन्‍होंने बताया कि “मैं पंजाब में किसानों की पोती, भतीजी, बहन हूँ। हमारे परिवार के सदस्य पंजाब में किसान हैं; कुछ के पास बहुत कम ज़मीन है। भारत में परिवार पहले से ही स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा की फीस के चलते संघर्ष कर रहे हैं। 230 से अधिक किसानों की मृत्यु हो चुकी है फिर भी सरकार उनके खिलाफ झूठे और नफ़रत फैलाने वाले अभियान चला रही है।”

ब्रिटेन में प्रवासी यूके सरकार को किसान आंदोलन के समर्थन में  खड़े होने के लिए ज़ोर देने पर दृढ़ हैं। 100,000 से अधिक हस्ताक्षर के साथ हमने याचिका दी है। लॉकडाउन समाप्त होने पर संसद में इस पर बहस होगी। सफ़्फ़ोल्क में रहने वाले किसान कुलदीप सिंह जड़ी-बूटियाँ और सब्जियाँ उगाते हैं और ट्रॉली टाइम्स को बताते हैं कि “मेरा भाई भारत में एक किसान है;  उसने एक सप्ताह तक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। हमारे पास पंजाब में बीस एकड़ जमीन है। मेरा भाई इस स्थिति से बेहद दुखी हुआ, क्योंकि सैकड़ों लोग मर चुके हैं और कई इन सर्द रातों में सड़कों पर सो रहे हैं। सरकार ने बिजली, इंटरनेट, पानी की व्यवस्था बंद कर दी है और प्रदर्शनकारी लोग शौचालय सुविधाओं को खोजने के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं।” किसानों के समर्थन में एकजुटता दिखाने के लिए दो ब्रिटिश भारतीय पिछले साल दिसंबर से अपने घर के पीछे के बगीचे में खुले आसमान के नीचे सो रहे हैं। 

भारत में पैदा होने वाले किसान सरबजीत सिंह अब यूके में रहते हैं। वे पंजाब के खरड़ में पच्चीस एकड़ ज़मीन के मालिक हैं। सिंह ने ट्रॉली टाइम्स से कहा, “मैं किसानों के परिवार से आता हूँ। हम गेहूं, चावल और सब्ज़ियाँ उगाते हैं। कई पीढ़ियों से, मेरा परिवार खेती कर रहा है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मेरे दादाजी फ्रंटलाइन पर लड़े और युद्ध में शहीद होने पर उनके परिवार को अतिरिक्त ज़मीन मिली।” लंदन और मिड्लंड्ज़ में इस संदेश के साथ होर्डिंग लगाए जा रहे हैं कि “क्या आप किसान विरोध प्रदर्शन के बारे में जानते हैं?”

ब्रिटिश भारतीय हैप्पी छोकर लंदन से हैं और उनके परिवार के पास भारत में बोडल में, दसूया, ज़िला होशियारपुर के पास जमीन है। ट्रॉली टाइम्स से बात करते हुए बताते हैं, “किसानों के विरोध प्रदर्शन का कवरेज देखना हमारे परिवार के लिए बहुत दुखदायक है। जब मैं बच्चा था तब हम लगभग हर साल पंजाब आते थे। मेरी बहुत सारी अच्छी यादें जुड़ी हैं। हमारे पास अधिक कुछ नहीं था लेकिन फिर भी हमेशा पर्याप्त था। मुझे यह जानकर बहुत असहाय महसूस होता है कि भारत सरकार इन किसानों के पास बची कुछ संपति भी छीन लेना चाहती है।”

यूके सरकार इस मामले पर चुप है और ब्रिटिश भारतीय प्रवासी इस मुद्दे पर अपना प्रभाव एकजुटता में जोड़ते हुए अपनी आवाज़ को सोशल मीडिया पर और बुलंद कर रहे हैं। वे किसानों के साथ खड़े होने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। प्रीत कौर गिल, बर्मिंघम एजबेस्टन की संसद सदस्य किसानों के विरोध प्रदर्शन के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए संसद के कई सदस्यों को जुटा रही हैं। सौ राजनेताओं द्वारा हस्ताक्षरित एक सर्वदलीय पत्र गृह सचिव डोमिनिक राब को भेजा गया है। यह पत्र राब को पूर्व ब्रिटिश उपनिवेश के किसानों के चल रहे विरोध प्रदर्शन के जवाब में ब्रिटिश सरकार की प्रस्तावित योजनाओं को निर्धारित करने के लिए कहता है।

गिल यूके में इस विरोध प्रदर्शन का समर्थन कर रहे लोगों की सहारना करते हुए ट्रॉली टाइम्स को बताती हैं, “यह महत्वपूर्ण है कि सरकार किसान यूनियनों के साथ दोबारा वार्ता शुरू करे और इसके संबंध में एक हल निकाले। मैं उम्मीद करती हूँ कि मानवाधिकारों का उल्लंघन आगे देखने को नहीं मिलेगा और यह सरकार अंतरराष्ट्रीय कानून की मर्यादा बनाए रखेगी।  हम यह भी उम्‍मीद कर रहे हैं कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे लोगों के अधिकारों पर हमले बंद होंगे और सरकार प्रदर्शनकारियों तक साफ पानी और अन्य सुविधाओं की पहुँच सुनिश्चित करेगी। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम लोकतंत्र में इस बात को पहचानें कि सामाजिक आंदोलन लोगों के लिए आगे बढ़ने और ऐसे बदलाव लाने का तरीका हैं, जो वे देखना चाहते हैं।”