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ये आंदोलन अन्न-खाता का भी है: दलजीत सिंह

दलजीत सिंह, 54, विर्क फ़ार्म किच्छा, उत्तराखंड के निवासी हैं। वे एक किसान परिवार से है व पेशे से डॉक्टर हैं । दलजीत सिंह का कहना है कि इन तीन काले कानूनो के बारे में उन्हें विभिन्न समाचार पत्रों ऐवं सोशल मीडिया से ज्ञात हुआ और तराई किसान संघठन में शामिल होकर उन्होंने इनका विरोध पहले तहसील स्तर, फिर ज़िला स्तर पर किया ।

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मिट्टी सत्याग्रह यात्रा पहुंची शाहजहांपुर-खेड़ा बॉर्डर

मिट्टी सत्याग्रह यात्रा जो 12 मार्च को भारत के विभिन्न राज्यों से शुरू हुई और किसानों के समर्थन में और तीन किसान विरोधी कानूनों को निरस्त करने की मांग के साथ 5 अप्रैल को एक टुकड़ी सुबह 4-5 बजे शाहजहाँपुर-खेड़ा बॉर्डर पर पहुँची। यह यात्रा अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति के संयोजक डॉ सुनीलम एवं नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटेकर के नेतृत्व में शाहजहाँपुर-खेड़ा बॉर्डर पहुँची।

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पेरू में भूमि सुधारों का दौर और किसान आंदोलन

पेरू के किसानों के जीवन में 1969 के भूमि सुधार के  बाद आए परिवर्तनों को समझने के लिए पेरू के पारम्परिक ग्रामीण संरचना को समझना अनिवार्य है। ग्रामीण पेरू में खेती; तटीय और पहाड़ी भागों में विभाजित है। अगर हम उत्पादन संबंध की बात करें तो, 1969 के पूर्व इन इलाकों में भूस्वामियों का वर्चस्व था।

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गुजरात में किसान आंदोलन की गूंज

गुजरात में किसान नेता राकेश टिकैत जी की पहली बार धुआंधार एंट्री किसान संघर्ष मंच (KSM) के जरिए करवाई गई। 4 अप्रैल को राकेश टिकैत जी का भव्य स्वागत आबू रोड रेलवे स्टेशन पर किया गया और आबू रोड से गुजरात बॉर्डर तक ट्रैक्टर रैली में 100 से ज्यादा ट्रैक्टर और 100 से ज्यादा अन्य वाहनों के साथ गुजरात से आए लोगों ने भाग लिया।

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ਮੋਦੀ ਦਾ ਭਰਮ

“ਮੇਰਾ ਨਾਂ ਬਾਬੂ ਸਿੰਘ ਹੈ। ਮੇਰੀ ਉਮਰ ਕਰੀਬ 70 ਸਾਲ ਹੈ। ਮੇਰੇ ਇਕ ਮੁੰਡਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਦਾ ਨਾਂ ਜਗਦੀਸ਼ ਹੈ। ਪਹਿਲਾਂ ਮੇਰਾ ਮੁੰਡਾ ਮੋਰਚੇ ‘ਚ ਵਾਰੀ ਲਾ ਗਿਆ ਸੀ ਤੇ ਹੁਣ ਮੈਂ ਆਇਆ ਹਾਂ। ਪਰ ਮੈਂ ਝੂਠ ਕਿਉਂ ਬੋਲਾਂ, ਹਾਲੇ ਤੱਕ ਮੇਰੀ ਘਰਵਾਲੀ ਇੱਥੇ ਨਹੀਂ ਆਈ। ਮੇਰਾ ਪਿੰਡ ਮਾਨਬੀਬੜੀਆਂ ਹੈ ਮਾਨਸਾ ਜ਼ਿਲ੍ਹੇ ਵਿੱਚ।

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फ़सल

हल की तरह 

कुदाल की तरह 

या खुरपी की तरह 

पकड़ भी लूं कलम तो 

फिर भी फसल काटने 

मिलेगी नहीं हम को। 

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दांडी से दिल्ली: मिट्टी सत्याग्रह यात्रा

किसान आंदोलन के दौरान देश की मिट्टी को बचाने के लिए अभी तक 320 से ज्यादा किसान शहीद हो चुके हैं। उनकी शहादत की याद में शहीद स्मारक बनाने हेतु और महात्मा गांधी जी से प्रेरणा लेते हुए देश के अलग अलग हिस्सों के किसानों द्वारा मिट्टी सत्याग्रह यात्रा की शुरुआत की गई है।

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कविता और फ़सल

ठंडे कमरों में बैठकर

पसीने पर लिखना कविता

ठीक वैसा ही है

जैसे राजधानी में उगाना फ़सल

कोरे काग़ज़ों पर।

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बढ़न सिंह

बढ़न सिंह, कैथल जिले के गड्डी पढ़ला गांव से है और पिछले कई दिनों से किसानी संघर्ष में शामिल हैं। उनके लिए यह संघर्ष आपसी भाईचारे, मेल मिलाप बढ़ाने की एक अच्छी शुरुआत है।

वह बताते है कि 1975 में जब उन्होंने करके अपने गांव में ही कुछ अच्छा करने की कोशिश करी तो बहुत तरह से उनका विद्रोह हुआ।

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विपुल- एक किशोर प्रदर्शनकारी

किसी भी आकर्षक, सुंदर और मासूम सा दिखने वाला लड़का विपुल, गाजीपुर मोर्चा का एक युवा प्रदर्शनकारी है। उसने अभी तक किशोरावस्था को पार नहीं  किया है। वह सिर्फ 18 साल का है। बीबीए द्वितीय वर्ष का छात्र विपुल, गाजियाबाद जिले के शेरपुर गांव का रहने वाला है।

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