Category: Edition 16

ਕਾਰਪੋਰੇਟ ਕੀ ਬਲਾ ਹੈ? ਆਓ ਸਮਝੀਏ।

ਕਿਸਾਨ ਅੰਦੋਲਨ ਦੌਰਾਨ ਕਾਰਪੋਰੇਟ ਸ਼ਬਦ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਹੜੱਪਣੇ, ਬੰਦੇ ਖਾਣੇ ਚੰਦਰੇ ਭੈੜੇ ਨਾਂਹਵਾਚਕ ਸ਼ਬਦਾਂ ਵਿਚ ਸਾਹਮਣੇ ਆਇਆ ਹੈ,ਇਸ ਵਰਤਾਰੇ ਨੂੰ ਸਮਝਣਾ ਬਹੁਤ ਜਰੂਰੀ ਹੈ। ਇਹ ਵਾਕ ਵਾਰ ਵਾਰ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ”ਐਂ ਕਿਵੇਂ ਅਸੀਂ ਆਪਣੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਕਾਰਪੋਰੇਟਾਂ ਨੂੰ ਦੇ ਦੇਈਏ?” ਆਮ ਬੰਦਾ ਕਾਰਪੋਰੇਟ ਤੋਂ ਭਾਵ ਅੰਬਾਨੀ, ਅਡਾਨੀ ਵਰਗਿਆਂ ਨੂੰ ਸਮਝਦਾ ਹੈ,ਜੋ ਕਿ ਕਾਫੀ ਹੱਦ ਤੱਕ ਠੀਕ ਵੀ ਹੈ।

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फ़सल

हल की तरह 

कुदाल की तरह 

या खुरपी की तरह 

पकड़ भी लूं कलम तो 

फिर भी फसल काटने 

मिलेगी नहीं हम को। 

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दांडी से दिल्ली: मिट्टी सत्याग्रह यात्रा

किसान आंदोलन के दौरान देश की मिट्टी को बचाने के लिए अभी तक 320 से ज्यादा किसान शहीद हो चुके हैं। उनकी शहादत की याद में शहीद स्मारक बनाने हेतु और महात्मा गांधी जी से प्रेरणा लेते हुए देश के अलग अलग हिस्सों के किसानों द्वारा मिट्टी सत्याग्रह यात्रा की शुरुआत की गई है।

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कविता और फ़सल

ठंडे कमरों में बैठकर

पसीने पर लिखना कविता

ठीक वैसा ही है

जैसे राजधानी में उगाना फ़सल

कोरे काग़ज़ों पर।

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बढ़न सिंह

बढ़न सिंह, कैथल जिले के गड्डी पढ़ला गांव से है और पिछले कई दिनों से किसानी संघर्ष में शामिल हैं। उनके लिए यह संघर्ष आपसी भाईचारे, मेल मिलाप बढ़ाने की एक अच्छी शुरुआत है।

वह बताते है कि 1975 में जब उन्होंने करके अपने गांव में ही कुछ अच्छा करने की कोशिश करी तो बहुत तरह से उनका विद्रोह हुआ।

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विपुल- एक किशोर प्रदर्शनकारी

किसी भी आकर्षक, सुंदर और मासूम सा दिखने वाला लड़का विपुल, गाजीपुर मोर्चा का एक युवा प्रदर्शनकारी है। उसने अभी तक किशोरावस्था को पार नहीं  किया है। वह सिर्फ 18 साल का है। बीबीए द्वितीय वर्ष का छात्र विपुल, गाजियाबाद जिले के शेरपुर गांव का रहने वाला है।

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कृषि क़ानून हर भारतीय के ख़िलाफ़ हैं

20 सितंबर 2020 को केंद्र सरकार ने तीन खेती  बिल राज्यसभा में पास करवा लिए। राज्य  सभा का क़ायदा यह है कि अगर एक भी सांसद बैलेट की माँग करता है तो वोट कराना ज़रूरी होता है। विपक्षी सांसदों की माँग को स्पीकर ने नहीं माना। उस समय सदन में सरकार बहुमत में नहीं थी। इस अलोकतांत्रिक रवैये से देश भर के किसानों में भारी नाराज़गी हुई।

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बिजोलिया किसान आंदोलन

आजादी से पूर्व मेवाड़ राज्य के बिजोलिया जागीर में (वर्तमान राजस्थान में) अत्यधिक भूमि राजस्व के खिलाफ एक किसान आंदोलन था। बिजोलिया आंदोलन (भीलवाड़ा जिले के बिजोलिया शहर के पास) के पूर्व जागीर (सामंती संपत्ति) में शुरू हुआ, यह आंदोलन धीरे-धीरे पड़ोसी जागीरों में फैल गया।

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सम्पादकीय

भारत का वर्तमान किसान आंदोलन अपने कई ऐतिहासिक पड़ावों को पर करता हुआ आगे बढ़ रहा है। यह आंदोलन अब न सिर्फ किसानों का आंदोलन है बल्कि देश के आम मेहनतकशों का आंदोलन भी बनता जा रहा है। 26 मार्च का ऐतिहासिक भारत बंद इसका प्रमाण है।

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वैचारिक बदलाव जरुरी

अपने किसान भाइयों में यदि दोगलापन रहेगा तो नहीं होगा आंदोलन जिंदाबाद! 

जैसे, कुरीतियों और अविश्वास में रमे समाज में योग्य शिक्षक नहीं मिल सकते। कई किसान दोनों हाथों में लड्डू लिए हुए हैं।

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