Author: Shivam Mogha

बिजोलिया किसान आंदोलन

आजादी से पूर्व मेवाड़ राज्य के बिजोलिया जागीर में (वर्तमान राजस्थान में) अत्यधिक भूमि राजस्व के खिलाफ एक किसान आंदोलन था। बिजोलिया आंदोलन (भीलवाड़ा जिले के बिजोलिया शहर के पास) के पूर्व जागीर (सामंती संपत्ति) में शुरू हुआ, यह आंदोलन धीरे-धीरे पड़ोसी जागीरों में फैल गया।

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बिरसा मुंडा द्वारा आदिवासी किसानों की सशक्त लड़ाई

पूर्व-औपनिवेशिक भारत में मुगल शासकों और उनके अधिकारियों के खिलाफ लोकप्रिय विरोध असामान्य नहीं था। सत्रहवीं और अठारहवीं शताब्दी में शासक वर्ग के खिलाफ कई किसान विद्रोह हुए। सत्ता द्वारा एक उच्च भूमि राजस्व मांग का आरोपण:

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किसान आंदोलन और उसके बदलते आयामों पर प्रोफेसर जोधका से बातचीत

उत्तर- कॉरपोरेटाइजेशन के कई मतलब हो सकते हैं खेती पहले किसान करता है वह किसान ही करता रहे लेकिन किसान अपने लिए खेती ना करें उसको कोई बताए इसको कॉर्पोरेट फार्मिंग का एक तरीका बोलते हैं वह फिर काफी सारे किसान रिक्रूट हो जाएंगे

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तेलंगाना किसान आंदोलन

तेलंगाना विद्रोह को औपचारिक रूप से वेट्टी चकिरी उदयम / तेलंगाना बंधुआ मजदूर आंदोलन के रूप में जाना जाता था। इसे तेलंगाना रायतांगा सयुध पोराटम (तेलंगाना किसान सशस्त्र संघर्ष) भी कहा जाता था। यह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में तेलंगाना क्षेत्र के दमनकारी सामंती प्रभुओं / जमींदारों के खिलाफ

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पश्चिमी उत्तरप्रदेश में इत्तर खेती के मुद्दे पर लामबंदी

राष्ट्रीय किसान मजदूर मंच के राष्ट्रीय अध्यक्षमर्थन दिया, इसी सिलसिले में उनसे  टेलीफोन के जरिए बातचीत की शिवम मोघा ने।

 प्रश्न- मेरा आपसे पहला सवाल यह है कि अभी जो किसान आंदोलन के मौजूदा हालात है और जो बीते चार-पांच दिन से पश्चिमी उत्तर प्रदेश से किसानो का सहभागिता बढ़ी,

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