Author: Ravinder Ravi

लोकतंत्र अब जनता की ज़िम्मेदारी है!

वैसे भी हम लोकतंत्र दिवस, अंतराष्ट्रीय स्तर पर ही तो मनाते आये है, खैर,, राष्ट्रीय लोकतंत्र तो वैसे खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। अब हमारे पास आखिर उत्सवधर्मीता से मनाने लायक लोकतंत्र रहा ही कहाँ है?   

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