किसान जन-आन्दोलन में बढ़ता आक्रोश
मुल्क के किसान पिछले चार महीने से जनविरोधी तीन खेती कानूनों को रद्द करवाने के लिए बड़े ही व्यवस्थित व अनुशासनिक तरीके से दिल्ली की सरहदों पर बैठे है। लेकिन इसके विपरीत भारत की फासीवादी सत्ता किसानों को सुनने की बजाए पहले दिन से किसानों के खिलाफ झुठा प्रचार कर रही है।