Day: ਅਪ੍ਰੈਲ 10, 2021

कविता और फ़सल

ठंडे कमरों में बैठकर

पसीने पर लिखना कविता

ठीक वैसा ही है

जैसे राजधानी में उगाना फ़सल

कोरे काग़ज़ों पर।

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बढ़न सिंह

बढ़न सिंह, कैथल जिले के गड्डी पढ़ला गांव से है और पिछले कई दिनों से किसानी संघर्ष में शामिल हैं। उनके लिए यह संघर्ष आपसी भाईचारे, मेल मिलाप बढ़ाने की एक अच्छी शुरुआत है।

वह बताते है कि 1975 में जब उन्होंने करके अपने गांव में ही कुछ अच्छा करने की कोशिश करी तो बहुत तरह से उनका विद्रोह हुआ।

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विपुल- एक किशोर प्रदर्शनकारी

किसी भी आकर्षक, सुंदर और मासूम सा दिखने वाला लड़का विपुल, गाजीपुर मोर्चा का एक युवा प्रदर्शनकारी है। उसने अभी तक किशोरावस्था को पार नहीं  किया है। वह सिर्फ 18 साल का है। बीबीए द्वितीय वर्ष का छात्र विपुल, गाजियाबाद जिले के शेरपुर गांव का रहने वाला है।

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कृषि क़ानून हर भारतीय के ख़िलाफ़ हैं

20 सितंबर 2020 को केंद्र सरकार ने तीन खेती  बिल राज्यसभा में पास करवा लिए। राज्य  सभा का क़ायदा यह है कि अगर एक भी सांसद बैलेट की माँग करता है तो वोट कराना ज़रूरी होता है। विपक्षी सांसदों की माँग को स्पीकर ने नहीं माना। उस समय सदन में सरकार बहुमत में नहीं थी। इस अलोकतांत्रिक रवैये से देश भर के किसानों में भारी नाराज़गी हुई।

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बिजोलिया किसान आंदोलन

आजादी से पूर्व मेवाड़ राज्य के बिजोलिया जागीर में (वर्तमान राजस्थान में) अत्यधिक भूमि राजस्व के खिलाफ एक किसान आंदोलन था। बिजोलिया आंदोलन (भीलवाड़ा जिले के बिजोलिया शहर के पास) के पूर्व जागीर (सामंती संपत्ति) में शुरू हुआ, यह आंदोलन धीरे-धीरे पड़ोसी जागीरों में फैल गया।

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सम्पादकीय

भारत का वर्तमान किसान आंदोलन अपने कई ऐतिहासिक पड़ावों को पर करता हुआ आगे बढ़ रहा है। यह आंदोलन अब न सिर्फ किसानों का आंदोलन है बल्कि देश के आम मेहनतकशों का आंदोलन भी बनता जा रहा है। 26 मार्च का ऐतिहासिक भारत बंद इसका प्रमाण है।

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वैचारिक बदलाव जरुरी

अपने किसान भाइयों में यदि दोगलापन रहेगा तो नहीं होगा आंदोलन जिंदाबाद! 

जैसे, कुरीतियों और अविश्वास में रमे समाज में योग्य शिक्षक नहीं मिल सकते। कई किसान दोनों हाथों में लड्डू लिए हुए हैं।

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हरित क्रांति ने किस तरह कुपोषण को बढ़ावा दिया?

हरित क्रांति के दौर में (1960s , 70s 80s ) सारी सरकारी मदद किसानों को सिर्फ गेहूं और धान उगाने के लिए मिली। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उस नीति का ज़ोर था खाद्य सुरक्षा, जिसको अनाज के रूप में ही समझा गया। और अनाज में गेहूं और धान को सबसे महत्वपूर्ण माना गया।

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होली के रंग, किसानों के संग

हजारों किसानों के लिए, गाजीपुर मोर्चा अब घर से दूर एक घर है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब के किसान यहां एक बड़े परिवार की तरह रह रहे हैं। उन्होंने दिल्ली की सीमा पर एक साथ संघर्ष किया है और त्योहारों को भी एक परिवार के रूप में मना रहे हैं।

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मोर्चों से परे किसान अांदोलन का असर

किसानों द्वारा भाजपा व उसके सहयोगी दलों के नेताओं का शांतिपूर्वक सामाजिक बहिष्कार देश के अलग अलग राज्यों में जारी है। पहली अप्रैल को हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला का हिसार पहुंचने पर किसानों द्वारा जमकर विरोध किया गया। किसानों ने किसान विरोधी दुष्यंत चौटाला का हवाई जहाज हिसार में उतरने नहीं दिया। 

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