वे अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहे है।

वे अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहे है।

(हिंदी अनुवाद मुकेश कुलरिया

शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के शहादत दिवस 23 मार्च, के दिन भाकपा (माले) लिबरेशन और इसके सभी सम्बद्ध संगठनों ने आंध्रप्रदेश के विशाखापट्टनम में तीन खेती कानूनों और वाईज़ैग स्टील प्लांट के निजीकरण के विरोध में एक जन संसद का आयोजन किया। हाल ही में केंद्र सरकार ने विशाखापटनम स्थित सरकारी स्टील निर्माता राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड से 100% सरकारी विनिवेश करने का फ़ैसला लिया।ये विशाखापट्टनम स्टील प्लांट, जो कि भारत का पहला तटीय स्टेटअवआर्ट स्टील प्लांट है, कि कॉर्पोरेट इकाई है। फ़रवरी शुरुआत में केंद्र सरकार ने इस प्लांट को बेचने की घोषणा की जिसमें 37,000 कर्मचारी (17,000 नियमित और 20,000 अनुबंध पर) काम करते है। 8 मार्च, 2021 को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में अपने वक्तव्य में कहा की सरकार इस प्लांट से शतप्रतिशत विनिवेश कर रही है। 

 सरकार ने इसे घाटे का उपक्रम बताया क्योंकि इस पर 22,000 का बैंक कर्ज है। बजाय लम्बे समय से प्लांट की स्थिति को सुधारने और अन्य लंबित मांगों को पूरा करने के, सरकार इसे एक बहाने के रूप में इस्तेमाल कर रही है। वाईज़ैग स्टील प्लांट कोई इकलौता उदाहरण नहीं है, सरकार सभी पब्लिक सेक्टर इकाइयों जैसे रेल्वे, उड्डयन, बंदरगाह आदि को निजी खिलाड़ियों के हाथों में बेच रही है। मोदी सरकार के ये निर्णय ऐसे वक्त में आए जब कोरोना के चलते निजी कंपनियों में कार्यरत लोगों की नौकरियों के जाने का संकट सब देख चुके है।  

 और वाईज़ैग स्टील प्लांट सिर्फ़ आंध्र प्रदेश के लोगों के लिए एक सरकारी इकाई ही नहीं है, बल्कि उनकी संघर्ष और पहचान भी है। साठ के दशक में तेलुगु लोगों ने लम्बे संघर्ष के बाद इसे हासिल किया जिसमें 32 लोग शहीद हुए। अंततः जब सरकार ने प्लांट लगाने का निर्णय लिया तब 64 गांवों को विस्थापित किया गया, इस वादे के साथ कि उनकी आने वाली पीढ़ी के लिए सुनहरे अवसर और नौकरियां होगी। मोदी सरकार का फ़ैसला लोगों के साथ वादाखिलाफी है। 

आंध्र प्रदेश के लोग फरवरी से सरकार के इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे है। प्रदर्शनकारी दिल्ली की सीमा पर आंदोलनरत किसानों के साथ मजबूती से खड़े हैं क्योंकि वे भी अपने अस्तित्व और आजीविका की लड़ाई लाद रहे है। इसलिए विशाखापटनम की जन संसद ने किसान आंदोलन के साथ अपना पुरज़ोर समर्थन का ऐलान किया। उन्होंने भाजपा सरकार के निजीकरण के खिलाफ लड़ने का फैसला किया है। जैन संसद ने आंध्र प्रदेश की वाय॰ एस॰ जगमोहन रेड्डी सरकार से भी विधानसभा में तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित करने की मांग की। मिल सकती है और खेती को आर्थिक दृष्टि से फ़ायदेमंद उद्यम बनाया जा सकता है।

 

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