खेत

Photo By: Ravan Khosa

याद आते हैं

मुझे वे दिन

जब धान काटते हुए

थक जाने पर

शर्त लगा लेता था अपने आपसे

कि पूरा खेत काटने पर ही उठूँगा

नहीं तो खो दूँगा

अपनी कोई प्यारी चीज़

मैंने भयवश दम साधकर

बचाई कितनी ही चीज़ें

डर आज भी है

कुछ चीज़ें खो देने का

मन आज भी है

कुछ पा लेने का

दम आज भी है

शर्त खेलने का

कुछ नहीं है तो वे खेत…