बढ़न सिंह

नवनीत सिंह

बढ़न सिंह, कैथल जिले के गड्डी पढ़ला गांव से है और पिछले कई दिनों से किसानी संघर्ष में शामिल हैं। उनके लिए यह संघर्ष आपसी भाईचारे, मेल मिलाप बढ़ाने की एक अच्छी शुरुआत है।

वह बताते है कि 1975 में जब उन्होंने करके अपने गांव में ही कुछ अच्छा करने की कोशिश करी तो बहुत तरह से उनका विद्रोह हुआ। गांव के बुजुर्ग इस बात के लिए तैयार नहीं थे कि नयी सोच को मौका दिया जाए। वह बताते हैं कि 1975 से 1980 तक उनकी सारी ऊर्जा लोगों को अपने साथ लाने में लगी। जाति व्यवस्था, दहेज प्रथा जैसी चीजों को खत्म करने का उनके प्रयास का बहुत विद्रोह हुआ।

उनका मानना है कि शिक्षा किसी भी हाल में हमें स्वार्थी बनाने के लिए नहीं होती। शिक्षा का मुख्य काम हमें समाज के काम आने लायक बनाना है। ज्ञान हमें औरों के करीब करता है ताकि हम उनके काम आ सके।उनके गांव में रहने का फैसला बहुत तरह से प्रश्न का कारण बना लेकिन वो कहते हैं कि मैंने अपना रास्ता खुद चुना और चाहे मै कुछ बहुत बढ़ा नहीं कर पाया लेकिन मुझे किसी बात का अफसोस नहीं है।गांव में रहकर उन्होंने अपने परिवार के बच्चों को सही दिशा देने का प्रयास किया जिसके फलस्वरूप आज उनके बच्चे अलग अलग सेवाएं तथा कुश्ती में नाम कमा रहे हैं।

उनका कहना है कि आज आंदोलन में नौजवानों को आगे आकर काम करते देखते हैं तो बहुत अच्छा लगता है। उनके अनुसार अब पहले से मुश्किलें कम हो गई हैं। बजुर्ग नई सोच को मौका देने लगे हैं जिससे नौजवान सिर्फ अपनी जिंदगी ही नहीं औरों की जिंदगी को भी सरल बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं।उन्हें उम्मीद है कि यह आंदोलन नए मौकों, नई ऊर्जा और नहीं सोच के लिए एक अच्छा भविष्य तैयार करेगा।