गुजरात में किसान आंदोलन की गूंज

PTI

गुजरात में किसान नेता राकेश टिकैत जी की पहली बार धुआंधार एंट्री किसान संघर्ष मंच (KSM) के जरिए करवाई गई। 4 अप्रैल को राकेश टिकैत जी का भव्य स्वागत आबू रोड रेलवे स्टेशन पर किया गया और आबू रोड से गुजरात बॉर्डर तक ट्रैक्टर रैली में 100 से ज्यादा ट्रैक्टर और 100 से ज्यादा अन्य वाहनों के साथ गुजरात से आए लोगों ने भाग लिया। छापरी गांव में महापंचायत की गई जहां ज्यादातर किसान दलित, मालधारी, रबारी आदिवासी और अन्य समाज के लोग शामिल हुए। 

 राकेश जी ने बताया कि युवाओं को कई तरीके से सरकार से लड़ना पड़ेगा, एक युवा ट्रैक्टर से लड़े, जो ट्रैक्टर से नहीं लड़ सकता है वह ट्विटर से सरकार के सामने लड़े, और और तीनों कृषि कानूनों का विरोध करे। जब तक सरकार कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती है गुजरात के किसान बंधन में है। और अगर गुजरात में किसान अपने के हित की बात करते है तो वहां की सरकार उन्हें जबरदस्ती रोकती है। उन्हें प्रेस कॉन्फ्रेंस तक नहीं करने दिया जाता है और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ही ऐसे ही किसान नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को गुजरात पुलिस उठा लेती है। गुजरात में आंदोलन मे शामिल होने वाले साथियों को और किसानों को गांव में पुलिस के जरिए डर दिखाकर रोका जाता है। जो लोग दिल्ली में किसान आंदोलन को सपोर्ट करने के लिए आते हैं उन्हें गुजरात से छुपकर दिल्ली आना पड़ता है और दिल्ली से वापस आने के बाद पुलिस व प्रशासन के भिन्न-भिन्न तरीके के दबाव झेलने पड़ते हैं। यह लड़ाई बहुत लंबी है और गुजरात के किसान जिस तरीके से डर और अघोषित इमरजेंसी के खौफ में रहते हैं उन्हें इस खौफ से मुक्त करवाना है।  

तकरीबन ढाई हजार लोग और डेढ़ सौ से ज्यादा वाहन और ट्रैक्टरों के साथ क़ाफ़िला अंबाजी बॉर्डर से गुजरात में प्रवेश किया।  और अंबाजी होते हुए पालनपुर में सभा हुई और रास्ते में आने वाले गांवों में यात्रा का स्वागत किया गया। अहमदाबाद में साबरमती आश्रम में गांधी जी के आशीर्वाद लेते हुए 5 अप्रैल को बारडोली जहां पर सरदार वल्लभ भाई पटेल ने किसानों की लड़ाई लड़ी थी वहां पर किसानों के साथ महासभा की गई। इसमें गुजरात में आने वाले दिनों में जरूरत पड़ने पर गुजरात की राजधानी गांधीनगर में दिल्ली में चल रहे आंदोलन के तर्ज पर आंदोलन चलाने के लिए आह्वान किया गया। 

गुजरात के विभिन्न संगठन अनहद, गुजरात सामाजिक मंच, किसान संघर्ष समिति, एवं विविध दलित व आदिवासी संगठन किसान आंदोलन के समर्थन में खुलकर खड़े हुए हैं और आने वाले दिनों में गुजरात में किसान आंदोलन को तेज किया जाएगा।