उड़ीसा से दिल्ली: एक दुस्साहसिक-दुर्गम यात्रा!

श्रीनिवास

दिल्ली की सीमाओं पर करीब दो महीने से जारी और केंद्र की आँख की किरकिरी बने अभूतपूर्व किसान आन्दोलन की ओर देश की नजरें टिकी हुई हैं। आन्दोलन को बदनाम करने के प्रयासों के बीच सत्ता पक्ष के लोग और सरकार समर्थक यह भी पूछ रहे हैं कि सम्बद्ध कृषि कानूनों से सिर्फ पंजाब और हरियाणा के किसानों को कष्ट क्यों है? यह भी बताया जा रहा है कि शेष भारत में तो इन कानूनों का कोई विरोध या इस आन्दोलन का समर्थन नहीं हो रहा है। इन सवालों का कोई स्पष्ट जवाब नहीं है, हालाँकि यह बात शायद पूरा सच नहीं है कि इस आन्दोलन का कहीं समर्थन नहीं हो रहा है। इसका एक प्रमाण है उडीसा से लगभग पांच सौ लोगों कीदिल्ली चलोयात्रा, जिसका बंगाल, झारखण्ड और बिहार में जोरदार और उत्साह से स्वागत हुआ। नव निर्माण किसान संगठन की 15 जनवरी से ओड़िशा से दिल्ली तक सात दिनों की पांच राज्यों से होकर  ‘दिल्ली चलो यात्राबनारस के बाद जौनपुर के पाली गांव में पहुंची थी।उड़ीसा से पांच सौ किसानों का जत्था 26 जनवरी को तय किसानों की रैली में शामिल होने के लिए निकले संकल्पबद्ध लोगों का जत्था कानपुर से आगरा के रास्ते पर है।

21 जनवरी को जत्था रात कोई 11 बजे कानपुर पहुंचा. लगभग नजरबंदी की हालत में चल रही थी और करीब डेढ़ सौ पुलिसकर्मी साथ चल रहे थे। ठहरनेखाने की व्यवस्था प्रशासन ने ही की। वैसे स्थानीय समर्थकों ने भी भोजन की व्यवस्था कर रखी थी। ये कानपुर शहर में चौ. चरण सिंह की प्रतिमा तक जाना चाहते थे। भारी जद्दोजहद के साथ यात्रा जारी है। प्रशासन के नानुकुर और यात्रियों की जिद के बाद कुछ लोगों को कानपुर शहर में चरण सिंह की प्रतिमा तक जाने दिया गया। पर और किसी से मिलने की अनुमति नहीं दी गयी। किसान भी अड़ गये कि जब आप तय रूट से नहीं जाने दे रहे तो आप वाहन में ईंधन भरवाइये या फिर हमें समर्थकों से मिलने दें, जो हमारी सहायता के लिए तत्पर हैं। ये वहीं जमे रहने पर अड़ गये। अंततः इनसे कहा गया कि आप अपने लोगों को बुला लें।पर मुरादाबाद की ओर जाने से रोक दिया गया। 

यात्रा संयोजक हिमांशु तिवारी बताते हैं, “उत्तर प्रदेश प्रशासन किसानों की किसान दिल्ली चलो यात्रा को लगभग नजरबंद जैसी स्थिति में रूट बदल कर ले जा रही है। यात्रा प्रयागराज से आगे बढ़ी है। सरकार ने रूट बदला है तो किसानों की भोजन और पानी की व्यवस्था सरकार की बनती है जो उन्होंने वादा भी किया था और अभी तक नही कराया है।

गत 16 जनवरी की रात उड़ीसा के कारवां के नेतृत्वकर्ता साथी अक्षय और हिमांशु तिवारी को मैंने मजाक में ही कहा थाअभी तक आप गैर भाजपा शासित राज्यों म़े यात्रा करते रहे ह़ै. कल से, झारखंड से निकलते ही आपका मार्ग थोड़ा दुर्गम हो जायेगा। उन्होंने हंसते हुए कहा थाबिहार के मित्रों ने आश्वस्त किया है कि वे हर चुनौती के लिए तैयार हैं। बिहार में इनका जोरदार स्वागत हुआ भी।उड़ीसा से संकल्प लेकर निकले किसान ना सिर्फ़ दिल्ली पहुँचेंगे बल्कि इस आंदोलन के राष्ट्रव्यापी स्वरूप पर सवाल उठाने वालों को भी करारा जवाब मिलेगा।