हम लड़ेंगे-हम जीतेंगे
रुद्रपुर) उत्तराखंड ने रुद्रपुर जिला के ऊधम सिंघ नगर में पहली मार्च 2021 को किसान महापंचायत का आयोजन किया। इस स्थल को पहले मोदी मैदान कहा जाता था।सभा में इस मैदान का नाम बदल कर किसान मैदान रखा गया ।
रुद्रपुर) उत्तराखंड ने रुद्रपुर जिला के ऊधम सिंघ नगर में पहली मार्च 2021 को किसान महापंचायत का आयोजन किया। इस स्थल को पहले मोदी मैदान कहा जाता था।सभा में इस मैदान का नाम बदल कर किसान मैदान रखा गया ।
किसान आंदोलन को शुरू हुए काफ़ी वक्त हो गया है, बहुत से सवाल जस से तस बने हुए है। कई नए सवाल उनमें जुड़ गए है लेकिन एक सवाल जो अब हाशिए पर चला गया है, वो है, “ये आंदोलन कब तक चलेगा?” आंदोलन शब्द के मायने में एक जोश, जुनून और आक्रामकता का उरूज झलकता है
तीन नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे भारतीय किसानों और सरकार द्वारा सबसे बड़े विरोध के दमन का फुटेज दुनिया भर में वायरल हो चुका है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन से सवालों के दौरान भी यह मुद्दा उठाया गया है।
दमनकारी और संवेदनहीन केन्द्र सरकार की तमाम साजिशों को अपने हौसले से नाकाम करते हुए और आम लोगों को अपने मुद्दों को अच्छे से समझाकर व्यापक जनसमर्थन हासिल करते हुए किसान आंदोलन 6 मार्च को अपने सौ दिन पूरे करने जा रहा है।
नवंबर का महीना था और बलजिन्दर कौर के घर पर बड़ी बेटी की शादी की तैयारियाँ चल रही थी। उत्तराखंड के शहीद ऊधम सिंह नगर जिले के मल्ली देवरिया गाँव में रहने वाली बलजिन्दर का जीवन एक आम औरत की तरह ढर्रे पर चल रहा था।
जब पिछले साल फरवरी 2020 में डोनॉल्ड ट्रम्प के स्वागत में भारतीयों ने एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया था, तो कुछ मील दूर भारतीय राष्ट्रीय राजधानी जल रही थी।
भारत सरकार की कैबिनेट ने 5 जून, 2020 को तीन नए खेती कानून पेश किए। इन कानूनों पर विवाद शुरू हो गया। जहां पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बुद्धिजीवियों द्वारा आलोचना और किसानों के प्रदर्शन के रूप में इन कानूनों का विरोध बढ़ रहा था
किसान आंदोलन के गाजीपुर मोर्चे पर गुजरात से गांधी जी का चरखा ले कर आए किसान और नौजवान भाईयों ने राकेश टिकैत के साथ चरखा चलाया। उनका उद्देश्य यह संदेश देना था कि गांधी ने जिस तरीके से आजादी की लड़ाई में चरखे का इस्तेमाल आम लोगों को जोड़ने और भारत को सही में आत्मनिर्भर करने के लिए किया वैसे ही आज किसानों को भी करना होगा।
पूर्व-औपनिवेशिक भारत में मुगल शासकों और उनके अधिकारियों के खिलाफ लोकप्रिय विरोध असामान्य नहीं था। सत्रहवीं और अठारहवीं शताब्दी में शासक वर्ग के खिलाफ कई किसान विद्रोह हुए। सत्ता द्वारा एक उच्च भूमि राजस्व मांग का आरोपण:
क्या आपको सिंघु विरोध स्थल पर दिल्ली पुलिस की अपने जूते से एक व्यक्ति के चेहरे को कुचलती हुई भयानक तस्वीर याद है? क्या पंजाब के नवांशहर से उस 22 वर्षीय, रणजीत सिंह नामक व्यक्ति को न्याय मिला? नहीं, नहीं मिला।
Write to us at mail@trolleytimes.com
VOICE OF THE FARMERS PROTEST
58B, Professor Enclave, Patiala, Punjab, India,
Tel: +919988638850, +918283854127