Author: Bal Gangadhar

गाँव की ज़मीन पर

अजनबी भी समझेगा, पिछड़ापन असल में

मैं गांव में बसता हूँ, या गांव मेरे दिल में

जहाँ ठाकुर की आवाज़ पर

सारे दलित उनकी खेतों पर 

पेट में भूख मनमें दहशत लेकर

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