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हमारे संगठन एजेन्सीयों से भी तेज़   

वकील हाकम सिंह

हमारे किसान नेताओं का सरल पहनावा और सरल बोल चाल देख कर कुछ युवा इनकी बुद्धि और दूरदर्शिता को कम आंक लेते हैं, जहां भारत की सभी एजेन्सीयों की सोच ख़त्म होती है, वहीं से हमारी संगठनों की सोच की शुरुआत होती है। मुझे संगठनों के कार्य का अनुभव है और हर संघर्ष अनुशासन से लड़ा जाता है और बहुत बुद्धिमत्ता से अंजाम तक पहुँचाया जाता है। क़यी महीनों तक संघर्षत लोगों को घड़े की तरह पकाया गया, शुरू में ट्रेनों को रोका गया, फ़िर टोल बंद करवाये गए, फ़िर रिलायंस के पेट्रोल पम्प और स्टोर बहिष्कार किए गये और जब घड़ा पूरी तरह से पक कर तैयार हो गया, तब दिल्ली की ओर एक गुर्रिला युद्ध की तरह बढ़ गए। लक्ष्य हर हाल में दिल्ली पहुँचना था पर कहते रहे कि जहां रोका जाएगा वहीं बैठ जाएँगे ताकि सरकार थोड़ी अनमनी रहे। आख़िर में पूरी समझ से सभी संघर्षी योद्धा, हमारे पिता, भाई, माता, बहनें और बच्चे दिल्ली पहुँचकर बिराजमान हो गए।

गोदी मीडिया की हर कोशिश को नकारते हुए इस संघर्ष को धार्मिक रंग नहीं चढ़ने दिया और एक क्षेत्रीय आंदोलन होने की मोहर नहीं लगने दी। इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर ले आए और पूरे देश में जागरुक्ता जगायी। अभी भी हमारी संगठनों ने अपने पत्ते छुपा रखे हैं, ज़रूरत पढ़ने पर वे एक एक करके खोल रहे हैं, ये संघर्षरत लोगों के लिए एक कुम्भ का मेला है। मेरा सभी नौजवानों को संदेश है की वे जल्दबाज़ी ना करें और किसान नेताओं के निर्देश अनुसार अनुशासन से चले और यह युद्ध जीत कर पंजाब वापिस आयें, पूरा पंजाब आपके स्वागत में इंतेज़ार कर रहा है।

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