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पुश्तैनी गाँव के लोग

Image: Nadeem Khawar

वहाँ वे किसान हैं जो अब सोचते हैं मजदूरी करना बेहतर है

जब कि मानसून भी ठीकठाक ही है

पार पाने के लिए उनके बच्चों में से कोई

गाँव से दो मील दूर मेन रोड पर

प्रधानमंत्री के नाम पर चालू योजना में 

कर्ज ले कर दुकान खोलेगा

और बैंक के ब्याज और फिल्मी पोस्टरों से दुकान को भर लेगा

कोई किसी अपराध के बारे में सोचेगा

और सोचेगा कि यह भी बहुत कठिन है

लेकिन मुमकिन है कि वह कुछ अंजाम दे ही दे

पुराने बाशिंदों में से कोई कोई

कभीकभार शहर की मंडी में मिलता है

सामने पड़ने पर कहता है तुम्हें सब याद करते हैं

कभी गाँव आओ अब तो जीप भी चलने लगी है

तुम्हारा घर गिर चुका है लेकिन हम लोग हैं

मैं उनसे कुछ नहीं कह पाता

यह भी कि घर चलो कम से कम चाय पी कर ही जाओ

कह भी दूँ तो वे चलेंगे नहीं

एकदूरी बहुत है और शाम से पहले उन्हें लौटना ही होगा

दूसरेवे जानते हैं कि शहर में उनका कोई घर हो नहीं सकता।

 

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