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इंक़लाब की वाणी

Photo by Jaskaran Singh

हमने उन्हें सुनानी हैं जो

इंक़लाब की वाणी हैं

पिंड से निकली लहरों को

दिल्ली तक पहुँचानी हैं

बेदर्द इतिहास के पन्नों को 

जज्बातदिल समझानी हैं

सत्ता के गलियारों को 

गुरुवाणी हमें सुनानी हैं

प्रेम के ढाई आखर को

दुनिया तक फैलानी हैं

सबको हमें सुनानी हैं जो

इंक़लाब की वाणी हैं

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