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किसान आंदोलन के 6 माह – ग़ाज़ीपुर मोर्चा

किसान घर से निकल कर सड़क पर बैठा शांतिपूर्ण तरीके से रोष प्रकट कर रहा है – इस बात को 26 मई 2021 के दिन पूरे 6 माह बीत गए हैं पर सरकार टस से मस नहीं हुई। पहले कड़ाके की ठंड फिर तपती गर्मी और अब आँधी- तूफानों ने किसान का हौसला परखा, इतना ही नहीं बल्कि कितने किसान भाइयों ने अपनी जान तक नौशावर कर दी ताकि आगे आने वाली नस्लों को कोई नुकसान ना पहुँचे और सारा देश अन्न को ना तरसे।

ऐसा नहीं है कि इस आंदोलन को सिर्फ 6 माह ही हुए हैं, ये आंदोलन तो जब से सरकार ने कानून पास किए तब से चल रहा है। उस समय आंदोलन अपने अपने क्षेत्र तक सीमित था लेकिन अब ये पूरे देश में फैल कर, एक जन-आंदोलन के रूप में उभरा है। सरकार ने पुरज़ोर कोशिश की इस आंदोलन को खत्म करने की, कभी जातिवाद का नाम देकर, कभी किसानों को आतंकवादी बता कर, तो कभी इसको सिर्फ़ पुरुषों का आंदोलन बता कर। परंतु किसानों ने सरकार की एक न चलने दी और सारी दुनिया को दिखा दिया कि एकता किसे कहते हैं।

इसी एकता का प्रदर्शन करने के लिए 200 से अधिक किसानों का एक क़ाफ़िला किसान आंदोलन के 6 माह पूरे होने पर ग़ाज़ीपुर मोर्चे में पहुँचा। रस्ते में उन्होंने सरकार के पुतले फूंके और जोरदार नारे लगाए। एक किसान भाई ने बताया कि जैसे ही हम लोग ग़ाज़ीपुर मोर्चे पर पहुँचे वहाँ पहले से मौजूद किसानों ने ज़ोरदार नारे लगाकर हमारा स्वागत किया और सब ने काले झंडे फ़ैराते हुए रैली निकाली। रोष प्रकट करने के लिए सभी किसानों ने अपनी बाज़ू पर काले रंग के बैच लगाए हुए थे। बाद में सब लोग मंच के पास इकट्ठा हुए और अपने अपने विचार प्रकट किए। शाम को सभी ने एक दूसरे की हौसला अफजाई की और आंदोलन को जारी रखने की कसम खाई।

किसी आंदोलन को 6 महीने तक शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखना अपने आप में एक बहुत बड़ी जीत है। कोरोना काल में जब सब अपने और अपने परिजनों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं, हमारे देश का अन्नदाता बेचारा सड़क पर बैठा कानूनों के रद्द होने का इंतेज़ार कर रहा है। सोचने की बात ये है कि सरकार के लिए क़ानून बड़े हैं या अपने देश के नागरिकों की ज़िंदगियाँ!

ऐसी ज़िंदगियाँ जो ना सिर्फ़ सड़कों पर बैठ कर आँधी तूफ़नो से बल्कि इस अंधी बहरी सरकार से भी जूझ रही हैं!

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